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質問

機会があったら、一度してみたいと思っていた質問をした人がいた。

ご本人様は何回?何百回?何万回??同じことを聞かれているのかなーと思いつつ。

FB 415 -कल के कार्यक्रम में जब कुछ प्रश्न पूछने का अवसर जनता को दिया गया , उनमें से एक ने जानना चाहा कि , मेरे पिता एक लेखक कवी और ग्यानी , फिर आप ने फिल्मों को क्यूँ या कैसे चुना। … जब कि और जगहों पर परिवार का सदस्य उसी व्यवसाय में भर्ती किया जाता है जिसमें परिवार का सदस्य पहले से रहा हो , जैसे कि राजनीति में।
इसका मेरे पास सही जवाब नहीं था , पर मैंने बाबूजी कि एक कविता का अंश उन्हें बताया जिससे शायद वो संतुष्ट हुए हों ....
बाबूजी कि कविता का सार एक कविता में है कि :
" मेरे बेटे , बेटे होने से मेरे उत्तराधिकारी नहीं होंगे, जो मेरे उत्तराधिकारी होंगे, वो मेरे बेटे होंगे "~

誰のことか、書かずともわかりますよね。

Facebookではヒンディー語での投稿もあるので、嬉しい

孫あたりで誰か文学の道に進んでくれる人はいないかなぁ。


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